Sardar Vallabhbhai Patel Biography in Hindi: लौह पुरुष के जीवन के 10 महान अध्याय
1. आधुनिक और अखंड भारत के निर्माण में यदि किसी एक व्यक्ति के योगदान को सबसे अद्वितीय और युगांतरकारी माना जाए, तो वे निश्चित रूप से मर्यादा और दृढ़ता के प्रतीक सरदार वल्लभभाई पटेल हैं। उनका जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में एक साधारण पाटीदार किसान परिवार में हुआ था, और उनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल तथा माता का नाम लाडबा देवी था। बचपन से ही वल्लभभाई के स्वभाव में अटूट साहस, अद्भुत संगठन क्षमता और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का एक अनोखा जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ था। उनके पिता खुद 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की झांसी की रानी की सेना के एक बहादुर योद्धा रहे थे, जिसके कारण देशभक्ति और निर्भीकता उन्हें विरासत में मिली थी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अत्यधिक संघर्षों के बीच स्थानीय स्कूलों से पूरी की, जहाँ उनकी मेधावी बुद्धि और नेतृत्व क्षमता ने बचपन में ही सबको प्रभावित कर दिया था।
2. वल्लभभाई पटेल के शुरुआती जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य एक सफल वकील बनना था, जिसके लिए उन्होंने बिना किसी बड़ी वित्तीय सहायता के खुद अपनी मेहनत से कानून की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने अपनी लगन के बल पर जिला अधिवक्ता (District Pleader) की परीक्षा पास की और गोधरा तथा बोरसद जैसे शहरों में अपनी वकालत शुरू की, जहाँ वे जल्द ही एक बेहद सफल और निडर फौजदारी वकील के रूप में प्रसिद्ध हो गए। उनका सपना इंग्लैंड जाकर बैरिस्टर बनने का था, लेकिन उन्होंने अपनी जमा पूंजी और टिकट अपने बड़े भाई विट्ठलभाई को पहले इंग्लैंड भेजने के लिए दे दिए, जो उनके महान त्याग को दर्शाता है। बाद में, वर्ष 1910 में वे स्वयं इंग्लैंड गए और मिडल टेम्पल (Middle Temple) से महज 30 महीने में अपना 36 महीने का वकालत का कोर्स रिकॉर्ड अंकों के साथ पूरा किया। जब वे भारत लौटे, तो अहमदाबाद के सबसे सफल और वीआईपी बैरिस्टरों में उनकी गिनती होने लगी, जहाँ उनका जीवन पूरी तरह से आधुनिक और ऐशो-आराम से भरपूर था।
3. बैरिस्टर वल्लभभाई पटेल का जीवन तब पूरी तरह बदल गया जब वे वर्ष 1917 में पहली बार महात्मा गांधी के संपर्क में आए और उनके विचारों से गहराई से प्रभावित हुए। गांधी जी के आह्वान पर उन्होंने अपनी लाखों की वकालत और आधुनिक पश्चिमी पहनावे को हमेशा के लिए त्याग दिया और साधारण खाती धोती-कुर्ता अपनाकर देश सेवा में उतर गए। वर्ष 1918 में गुजरात के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान जब भयंकर अकाल के बावजूद अंग्रेज सरकार किसानों से जबरन कर वसूल रही थी, तब पटेल जी ने गांधी जी के मार्गदर्शन में इस आंदोलन का कुशल नेतृत्व किया। उन्होंने पूरे जिले के किसानों को संगठित किया और सरकार को टैक्स न देने के लिए मजबूर कर दिया, जिससे अंततः ब्रिटिश हुकूमत को झुकना पड़ा और कर माफ करना पड़ा। यह वल्लभभाई पटेल की पहली बड़ी राजनीतिक विजय थी, जिसने उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक मजबूत और जमीन से जुड़े नेता के रूप में स्थापित कर दिया।
4. सरदार पटेल के जीवन का सबसे ऐतिहासिक और टर्निंग पॉइंट आंदोलन वर्ष 1928 में हुआ, जिसे हम बारदोली सत्याग्रह के नाम से जानते हैं। प्रांतीय सरकार ने बारदोली के किसानों पर अचानक लगान में 22 प्रतिशत की भारी वृद्धि कर दी थी, जिसके खिलाफ वल्लभभाई ने एक अत्यंत अनुशासित और मजबूत आंदोलन खड़ा किया। उन्होंने पूरे बारदोली क्षेत्र को अलग-अलग शिविरों में बांटकर महिलाओं और पुरुषों को इस तरह संगठित किया कि अंग्रेज अधिकारी भी उनकी एकता को तोड़ नहीं पाए। इस आंदोलन की अभूतपूर्व सफलता और पटेल जी की बेजोड़ संगठन शक्ति को देखकर बारदोली की महिलाओं ने गांधी जी के माध्यम से उन्हें "सरदार" (Sardar) की महान उपाधि प्रदान की। इसके बाद से वे पूरे देश में 'सरदार पटेल' के नाम से जाने जाने लगे और इस आंदोलन ने यह सिद्ध कर दिया कि वे आम जनता के दिलों पर राज करने वाले नेता हैं।
5. वर्ष 1930 में महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए सवििनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) और ऐतिहासिक दांडी मार्च की सफलता में भी सरदार पटेल की बहुत बड़ी भूमिका थी। गांधी जी की यात्रा शुरू होने से ठीक पहले सरदार पटेल पूरे गुजरात के गांवों में घूम-घूमकर लोगों को इस नमक कानून के खिलाफ जागरूक कर रहे थे, जिसके कारण अंग्रेजों ने उन्हें यात्रा शुरू होने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी ने पूरे देश में राष्ट्रभक्ति की एक नई आग भड़का दी और देश के कोने-कोने में लोग सड़कों पर उतर आए। इसके बाद वर्ष 1931 के ऐतिहासिक कराची अधिवेशन (Karachi Session) में सरदार पटेल को सर्वसम्मति से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। उनके इस अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान ही कांग्रेस ने पहली बार भारत के नागरिकों के लिए 'मूल अधिकारों' (Fundamental Rights) और आर्थिक नीति का संकल्प पारित किया था, जो भारतीय संविधान का आधार बना।
6. सरदार पटेल केवल एक महान आंदोलनकारी ही नहीं थे, बल्कि वे कांग्रेस पार्टी के सबसे कुशल और वास्तविक प्रशासनिक कर्ताधर्ता थे, जो पर्दे के पीछे रहकर पूरी पार्टी को नियंत्रित करते थे। वर्ष 1937 के प्रांतीय चुनावों के दौरान उन्होंने पूरे देश में कांग्रेस के चुनाव प्रचार और उम्मीदवार चयन का काम इतनी बारीकी से संभाला कि अधिकांश प्रांतों में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकारें बनीं। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) के दौरान भी उन्होंने मुंबई के गवालिया टैंक मैदान में एक ओजस्वी भाषण देकर देशवासियों में जोश भर दिया था, जिसके बाद उन्हें अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ अहमदनगर किले में तीन साल के लिए नजरबंद कर दिया गया। जेल में खराब स्वास्थ्य के बावजूद उनका हौसला कभी कम नहीं हुआ और वे हमेशा देश की पूर्ण स्वतंत्रता के ब्लूप्रिंट पर काम करते रहे, जिससे वे कांग्रेस के सबसे व्यावहारिक और दूरदर्शी नेता बन गए।
7. 15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ, तो देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती भौगोलिक और राजनीतिक रूप से बिखरने से बचने की थी, और इस संकट के समय सरदार पटेल को देश का पहला गृह मंत्री (Home Minister) और उप प्रधानमंत्री (Deputy Prime Minister) बनाया गया। उस समय अंग्रेजों की कुटिल नीति के कारण भारत के अंदर कुल 562 स्वायत्त रियासतें (Princely States) मौजूद थीं, जिन्हें अपनी मर्जी से भारत या पाकिस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र रहने की छूट दी गई थी। मोहम्मद अली जिन्ना और अंग्रेज यह उम्मीद कर रहे थे कि भारत छोटी-छोटी रियासतों में टूटकर बिखर जाएगा। लेकिन सरदार पटेल ने अपनी अद्भुत कूटनीति, अदम्य साहस और देशभक्ति का परिचय देते हुए राजाओं को प्रिवी पर्स और लोकतंत्र का हिस्सा बनने का लालच और दबाव दोनों दिया। उन्होंने बिना कोई खून-खराबा किए लगभग सभी रियासतों का भारत संघ में शांतिपूर्ण विलय कराकर अखंड भारत का सपना सच कर दिखाया।
8. भारत के इस महान एकीकरण के दौरान तीन ऐसी रियासतें थीं जिन्होंने भारत में शामिल होने से साफ मना कर दिया था—जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू-कश्मीर। जूनागढ़ के नवाब के खिलाफ जब जनता ने विद्रोह किया, तो सरदार पटेल ने तुरंत वहां सेना भेजी और जनमत संग्रह (Plebiscite) कराकर उसे भारत का हिस्सा बना दिया। इसके बाद हैदराबाद के निजाम ने जब अपनी क्रूर रजाकार सेना के दम पर स्वतंत्र रहने या पाकिस्तान में मिलने की कोशिश की, तो सरदार पटेल ने वर्ष 1948 में "ऑपरेशन पोलो" (Operation Polo) नामक एक गुप्त सैन्य कार्रवाई शुरू की। भारतीय सेना ने मात्र पांच दिनों के अंदर निजाम की सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया और हैदराबाद का भारत में ऐतिहासिक विलय संपन्न कराया। कश्मीर के मामले को भी यदि जवाहरलाल नेहरू ने संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के बजाय पूरी तरह सरदार पटेल को सौंप दिया होता, तो आज कश्मीर की समस्या का जन्म ही नहीं होता।
9. सरदार पटेल को आधुनिक भारतीय प्रशासनिक सेवाओं का जनक यानी "फादर ऑफ ऑल इंडिया सर्विसेज" (Father of All India Services) भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने ही अंग्रेजों के जाने के बाद आईसीएस (ICS) को आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) के रूप में पुनर्गठित किया। वे प्रशासनिक अधिकारियों को देश की एकता और सुशासन को बनाए रखने के लिए "स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया" (Steel Frame of India) यानी भारत का फौलादी ढांचा कहते थे। इसके अलावा, विदेशी आक्रमण और विभाजन के बाद तबाह हो चुके गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प भी सरदार पटेल ने ही लिया था, जिसे उन्होंने सरकारी धन के बजाय जन सहयोग से पूरा कराया। देश के गृह मंत्री के रूप में उन्होंने आंतरिक सुरक्षा, खुफिया तंत्र और सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित किया था, जो आज भी भारत सरकार की रीढ़ की हड्डी बना हुआ है।
10. देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले इस महान युगपुरुष का निधन 15 दिसंबर 1950 को मुंबई में दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ, जिससे पूरा देश अपने सच्चे रक्षक को खोकर गहरे शोक में डूब गया। उनके अद्वितीय और कठोर निर्णयों के कारण उन्हें पूरी दुनिया में "लौह पुरुष" (Iron Man of India) और 'भारत का बिस्मार्क' कहा जाता है। वर्ष 1991 में उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न" (Bharat Ratna) से नवाजा गया। उनके इसी ऐतिहासिक योगदान को अमर बनाए रखने के लिए गुजरात में नर्मदा नदी के तट पर दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा "स्टैच्यू ऑफ यूनिटी" (Statue of Unity) का निर्माण किया गया है, जिसकी ऊंचाई 182 मीटर है। प्रत्येक वर्ष उनके जन्मदिन यानी 31 अक्टूबर को पूरा देश "राष्ट्रीय एकता दिवस" (National Unity Day) के रूप में मनाता है, जो हमें हमेशा एक अखंड और मजबूत भारत के रूप में रहने की प्रेरणा देता है। "The Iron Man: Sardar Vallabhbhai Patel"
